अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब कमेटी के समक्ष कहा कि मौजूदा समय में साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा बन चुकी है। उनके अनुसार विदेशी साइबर हमले केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं हैं बल्कि निजी कंपनियों बैंकिंग नेटवर्क ऊर्जा क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में सीआईएसए की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
मुलिन ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में एजेंसी अपनी मूल जिम्मेदारियों से भटक गई थी और अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सकी। उन्होंने कहा कि अब सरकार का लक्ष्य केवल एजेंसी को दोबारा सक्रिय करना नहीं बल्कि उसे दुनिया की सबसे सक्षम साइबर सुरक्षा संस्थाओं में शामिल करना है। इसके लिए नए नेतृत्व की नियुक्ति की जा रही है और अनुभवी विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा ताकि एजेंसी आधुनिक साइबर खतरों का तेजी से जवाब देने में सक्षम बन सके।
उन्होंने बताया कि फिलहाल एजेंसी अपनी जरूरत के मुकाबले लगभग आधे कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। सरकार का अनुमान है कि करीब 600 नए विशेषज्ञों की भर्ती से इसकी कार्यक्षमता में बड़ा सुधार आएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी पुराने पदों को भरना जरूरी नहीं है बल्कि जरूरत के अनुसार विशेषज्ञता आधारित नियुक्तियां की जाएंगी।
गृह सुरक्षा सचिव के अनुसार एजेंसी का पुनर्गठन एक लंबी प्रक्रिया होगी और नए निदेशक के कार्यभार संभालने के बाद इसे पूरी तरह प्रभावी बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है। इस दौरान संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के साथ तकनीकी क्षमताओं को भी नई दिशा दी जाएगी।
मुलिन ने सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर साझेदारी पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि मेटा गूगल जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियां अकेले साइबर अपराधियों और विदेशी हैकर समूहों का मुकाबला नहीं कर सकतीं। इसके लिए सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों के बीच सूचनाओं के आदान प्रदान तथा संयुक्त रणनीति की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि गृह सुरक्षा विभाग अपने आंतरिक नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है ताकि अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं को खत्म किया जा सके और साइबर ऑपरेशन अधिक तेज और प्रभावी बन सकें। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से विकसित हो रही डिजिटल तकनीकों को देखते हुए भविष्य में कांग्रेस से नए कानूनी दिशा निर्देश भी मांगे जा सकते हैं।
अमेरिका लगातार अपने सहयोगी देशों के साथ साइबर सुरक्षा सहयोग को भी मजबूत कर रहा है। भारत सहित कई साझेदार देशों के साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा साइबर रेजिलिएंस और उभरती तकनीकों की सुरक्षा को लेकर संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में साइबर युद्ध और डिजिटल सुरक्षा किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का सबसे अहम आधार बनने वाले हैं और इसी दिशा में अमेरिका अपनी तैयारियों को नई गति दे रहा है।
