मैच की शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और जर्मन टीम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। इसका फायदा भारत को सातवें मिनट में मिला, जब मनदीप सिंह ने शानदार मूव बनाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास और बढ़ गया। पहले क्वार्टर के अंतिम क्षणों में शिलानंद लाकड़ा ने बेहतरीन स्ट्राइक लगाकर भारत की बढ़त को दोगुना कर दिया। 13वें मिनट में आए इस गोल ने जर्मनी को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया और स्कोर 2-0 हो गया।
दूसरे क्वार्टर में जर्मनी ने वापसी की कोशिश की और भारतीय हाफ में लगातार हमले किए। हालांकि भारतीय डिफेंस चट्टान की तरह मजबूती से खड़ा रहा। जर्मनी को मिले पेनल्टी कॉर्नर भी भारतीय रक्षा पंक्ति और गोलकीपर मोहित की सतर्कता के सामने बेअसर साबित हुए। अमित रोहिदास ने भी महत्वपूर्ण मौके पर शानदार ब्लॉक लगाकर टीम को बढ़त बनाए रखने में मदद की। पहले हाफ के अंत तक भारत 2-0 से आगे रहा।
तीसरे क्वार्टर में भारत ने अपनी आक्रामक रणनीति जारी रखी। 35वें मिनट में नीलकांत शर्मा ने शानदार व्यक्तिगत कौशल का प्रदर्शन करते हुए कई जर्मन डिफेंडरों को छकाया और शानदार गोल दागकर भारत को 3-0 की मजबूत बढ़त दिला दी। यह गोल मैच का सबसे आकर्षक क्षणों में से एक रहा। हालांकि तीसरे क्वार्टर के अंत में जर्मनी के राफेल हार्टकोफ ने गोल कर अंतर कम करने की कोशिश की, लेकिन तब तक भारत मैच पर पूरी तरह पकड़ बना चुका था।
अंतिम क्वार्टर में जर्मनी ने वापसी के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने अनुशासित और संयमित खेल दिखाया। काउंटर-प्रेसिंग और विंग्स से तेज हमलों के जरिए भारत ने जर्मनी को दबाव में रखा। मैच के अंतिम मिनटों में जर्मनी को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उसे भी नाकाम कर दिया और 3-1 की यादगार जीत अपने नाम कर ली।
इस मुकाबले का एक और ऐतिहासिक पहलू रहा। अनुभवी खिलाड़ी मनप्रीत सिंह ने अपना 413वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते हुए दिलीप टिर्की का 412 मैचों का रिकॉर्ड तोड़ दिया और भारत के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए। वहीं मिडफील्ड में शानदार प्रदर्शन करने वाले हार्दिक सिंह को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। भारत की यह जीत टीम की बढ़ती ताकत और आगामी बड़े टूर्नामेंटों के लिए उसके मजबूत इरादों का संकेत मानी जा रही है।
