भारतीय टीम की इस शानदार और ऐतिहासिक जीत में सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई। स्मृति मंधाना ने पाकिस्तानी गेंदबाजों की जमकर खबर लेते हुए 44 गेंदों पर 68 रनों की बेहद प्रभावशाली पारी खेली, जिसमें नौ आकर्षक चौके और दो गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। मध्यक्रम में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने सूझबूझ का परिचय देते हुए 36 रन बनाए, जबकि अंतिम ओवरों में विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने महज 17 गेंदों पर ताबड़तोड़ 34 रन कूटकर भारतीय टीम के स्कोर को एक सम्मानजनक और मजबूत स्थिति तक पहुंचाया। पाकिस्तान की ओर से कप्तान फातिमा सना और सादिया इकबाल ने जरूर कुछ सफलताएं हासिल कीं, लेकिन वे भारतीय बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहीं।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और भारतीय गेंदबाजों के सटीक आक्रमण के सामने उनकी बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। पाकिस्तान की तरफ से केवल सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली ही भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना कर सकीं, जिन्होंने 35 गेंदों में 41 रनों का योगदान दिया। उनके अलावा आलिया रियाज ने 18 रन, गुल फिरोजा और आयशा जफर ने 12-12 रन बनाए। टीम की बाकी सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी छूने में पूरी तरह नाकाम रहीं और पूरी टीम 17 ओवरों में ही पवेलियन लौट गई।
भारत की इस ऐतिहासिक गेंदबाजी प्रदर्शन की कमान दीप्ति शर्मा के हाथों में रही, जिन्होंने अपनी फिरकी के जाल में पाकिस्तानी बल्लेबाजों को ऐसा उलझाया कि उन्होंने अकेले ही 5 विकेट चटकाकर विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी। दीप्ति के इस घातक स्पेल के अलावा श्री चरणी ने बेहतरीन लाइन-लेंथ से गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट अपने नाम किए, जबकि सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने भी पार्ट-टाइम स्पिनर के तौर पर 1 विकेट हासिल किया। इस मैच की खास बात यह रही कि पाकिस्तानी टीम के कुल 9 विकेट भारतीय स्पिन गेंदबाजों के खाते में गए, जबकि एक बल्लेबाज मुनीबा अली रन आउट होकर पवेलियन लौटीं।
इस शानदार जीत के बाद भारतीय महिला टीम का मनोबल सातवें आसमान पर है और टीम अब अपने अगले मुकाबले में 17 जून को नीदरलैंड्स का सामना करने के लिए मैदान पर उतरेगी। भारतीय टीम आज तक विमेंस टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम नहीं कर सकी है, जहां उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साल 2020 में उपविजेता के रूप में रहा था। इस बार हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय टीम का एकमात्र लक्ष्य पहली बार विश्व विजेता बनकर इतिहास रचना है, जिसकी शुरुआत उन्होंने चिर-प्रतिद्वंद्वी पर एकतरफा जीत दर्ज करके कर दी है।
