शुक्रवार को दिल्ली में उनके निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर देहरादून स्थित आवास ले जाया गया, जहां उन्हें राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार Manikarnika Ghat में किया जाना है। परिवारजन उनके पार्थिव शरीर को निजी विमान से वाराणसी लेकर पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा मणिकर्णिका घाट के लिए रवाना हुई।
वाराणसी एयरपोर्ट पर मौजूद उनके साथियों और पूर्व खिलाड़ियों ने भावुक होकर उन्हें याद किया। पूर्व खिलाड़ी वीरेंद्र उपाध्याय ने कहा कि जसपाल राणा का जाना भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में उनका निधन बेहद दुखद है और खेल जगत ने एक महान प्रतिभा को खो दिया है।
अंतरराष्ट्रीय कोच रोहित जैन ने उन्हें भारतीय पिस्टल शूटिंग का अग्रदूत बताते हुए कहा कि उन्होंने देश में निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके अनुसार, जब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड एक राज्य हुआ करते थे, तब जसपाल राणा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर पूरे देश का ध्यान इस खेल की ओर आकर्षित किया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में उनके जैसा समर्पित और सफल कोच मिलना बेहद कठिन है।
पूर्व राष्ट्रीय शूटर रामेंद्र शर्मा ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने 1987 से जसपाल राणा को खेलते देखा था। उनके मुताबिक, राणा देश के पहले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने जूनियर विश्व स्तर पर बड़ी सफलता हासिल कर भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा की उपलब्धियों ने देश के हजारों युवा खिलाड़ियों को प्रेरित किया और शूटिंग खेल को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।
पूर्व राइफल शूटर पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि जसपाल राणा ने अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि भारतीय खिलाड़ी विदेशों में भी विश्वस्तरीय सफलता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया और विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। श्रीवास्तव ने बताया कि कम उम्र में ही उन्हें Arjuna Award से सम्मानित किया गया था। बाद में उन्हें Padma Shri सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ी, मार्गदर्शक और कोच के रूप में जसपाल राणा का योगदान भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और भारतीय खेल जगत हमेशा उनके योगदान को याद रखेगा।
