अधिकांश लोगों के बीच यह धारणा होती है कि पंखा कमरे का तापमान कम करता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। सीलिंग फैन सीधे तौर पर कमरे को ठंडा नहीं करता, बल्कि हवा के प्रवाह को बढ़ाकर शरीर को अधिक ठंडक का एहसास कराता है। जब हवा त्वचा से टकराती है तो पसीना तेजी से सूखता है और शरीर की गर्मी बाहर निकलती है। इसी कारण व्यक्ति को वास्तविक तापमान की तुलना में अधिक ठंडक महसूस होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, AC चलाने के दौरान कमरे में ठंडी हवा नीचे की ओर जमा होने लगती है जबकि गर्म हवा ऊपर बनी रहती है। इससे कमरे के अलग-अलग हिस्सों में तापमान का अंतर पैदा हो जाता है। ऐसे में एयर कंडीशनर को पूरे कमरे को समान रूप से ठंडा करने के लिए अधिक समय तक काम करना पड़ता है।
सीलिंग फैन इस समस्या को काफी हद तक कम कर देता है। फैन ठंडी और गर्म हवा को पूरे कमरे में समान रूप से फैलाता है, जिससे हर हिस्से में एक जैसी ठंडक महसूस होती है। इसका फायदा यह होता है कि AC का थर्मोस्टेट अपेक्षाकृत जल्दी निर्धारित तापमान तक पहुंच जाता है और कंप्रेसर को कम समय तक चलना पड़ता है। इससे बिजली की खपत में कमी आती है।
ऊर्जा विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि AC को पहले 22 डिग्री सेल्सियस पर चलाया जाता था, तो फैन के साथ इसे 24 या 25 डिग्री सेल्सियस पर सेट करने के बाद भी लगभग समान स्तर का आराम प्राप्त किया जा सकता है। तापमान में यह छोटा बदलाव बिजली की खपत पर बड़ा असर डाल सकता है। अनुमान है कि AC का तापमान हर एक डिग्री बढ़ाने पर ऊर्जा खपत में लगभग 4 से 8 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
एक सामान्य एयर कंडीशनर जहां 1000 से 2000 वॉट तक बिजली की खपत करता है, वहीं अधिकांश सीलिंग फैन केवल 15 से 70 वॉट के बीच बिजली लेते हैं। ऐसे में फैन का अतिरिक्त खर्च बहुत कम होता है, जबकि AC पर पड़ने वाला दबाव घटने से कुल बिजली बिल में उल्लेखनीय बचत संभव हो जाती है।
तकनीकी रूप से उन्नत BLDC फैन इस बचत को और बढ़ा सकते हैं। ये फैन पारंपरिक पंखों की तुलना में काफी कम बिजली खर्च करते हैं और फुल स्पीड पर भी बेहद कम ऊर्जा का उपयोग करते हैं। यही कारण है कि ऊर्जा दक्ष उपकरणों की मांग लगातार बढ़ रही है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि यदि कमरे में कोई मौजूद न हो तो पंखे को बंद कर देना चाहिए। खाली कमरे में चलता हुआ फैन केवल बिजली खर्च करता है। इसके अलावा AC के फिल्टर और पंखे के ब्लेड की नियमित सफाई भी जरूरी है, क्योंकि धूल जमा होने पर दोनों उपकरणों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और बिजली की खपत बढ़ सकती है।
