पर्यावरण संरक्षण, प्रशासनिक दक्षता एवं प्रभावी कार्यान्वयन पर हुआ व्यापक मंथन
झाँसी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारियों हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय ने की। कार्यशाला में राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रशासनिक, वित्तीय एवं क्रियात्मक पक्षों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया तथा पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ विश्वविद्यालय परिसर स्थित नक्षत्र वाटिका में पौधारोपण के साथ हुआ। माननीय कुलपति महोदय, प्रो. मंजू सिंह, श्री समरदीप सक्सेना, श्री ज्ञानेंद्र कुमार, कार्यक्रम अधिकारियों एवं स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया। स्वयंसेवकों का एक अनोखा प्रयास ” टपका सिंचाई” का प्रयोग किया जिसमें घड़े की मदद से इस भीषण गर्मी में बचाया जा सकता है। इसके उपरांत दीप प्रज्ज्वलन एवं औपचारिक उद्घाटन सत्र के साथ प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में माननीय कुलपति महोदय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनशैली और सामाजिक दायित्व का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों का दोहन, बढ़ता प्रदूषण तथा जल संकट जैसी चुनौतियाँ सम्पूर्ण मानवता के सामने गंभीर प्रश्न खड़े कर रही हैं। ऐसे समय में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक और कार्यक्रम अधिकारी समाज में जागरूकता उत्पन्न करने तथा सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्य वक्ता एवं विशिष्ट अतिथि प्रो. मंजू सिंह,विशेष कार्याधिकारी एवं राज्य संपर्क अधिकारी, राष्ट्रीय सेवा योजना, उत्तर प्रदेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बनाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल कार्यक्रम अधिकारियों को प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रशिक्षण प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा के साथ राष्ट्रीय सेवा योजना की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाना भी है। राष्ट्रीय सेवा योजना केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को समाज से जोड़ने वाला एक सशक्त आंदोलन है।

विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता श्री समरदीप सक्सेना, क्षेत्रीय निदेशक उत्तर प्रदेश उत्तराखंड क्षेत्रीय निदेशालय , लखनऊ , ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़ते हुए उनमें संवेदनशीलता और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम अधिकारियों की सक्रियता और दक्षता ही NSS गतिविधियों की सफलता का आधार है।
कार्यक्रम में कुलसचिव एवं राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक श्री ज्ञानेंद्र कुमार ने राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रशासनिक संरचना, विश्वविद्यालय स्तर पर संचालित गतिविधियों तथा कार्यक्रम अधिकारियों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना शिक्षा और समाज के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करती है।
प्रशिक्षण सत्रों का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना क्षेत्रीय निदेशालय, लखनऊ से आए प्रशिक्षकों द्वारा किया गया। यंग प्रोफेशनल रोशन सिंह ने राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यप्रणाली, नियमित गतिविधियों, विशेष शिविरों के आयोजन तथा स्वयंसेवकों के नेतृत्व विकास से संबंधित विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि एक कुशल कार्यक्रम अधिकारी ही स्वयंसेवकों की क्षमताओं को समाजहित में प्रभावी रूप से उपयोग कर सकता है।
युवा अधिकारी राजेश तिवारी ने राष्ट्रीय सेवा योजना के बजट प्रबंधन, वित्तीय अभिलेखों के संधारण, लेखा प्रक्रिया, रिपोर्ट लेखन तथा डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने प्रतिभागियों को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से वित्तीय पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और प्रभावी प्रशासनिक प्रबंधन के महत्व से अवगत कराया।
कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यप्रणाली एवं कार्यक्रम अधिकारियों की भूमिका, बजट एवं वित्तीय प्रबंधन, विशेष शिविरों एवं नियमित गतिविधियों के संचालन, रिपोर्ट लेखन, प्रलेखन तथा डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रश्नोत्तर एवं अनुभव साझा सत्र में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा विशेषज्ञों से विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम की सह-संयोजक एवं वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. श्वेता पांडेय ने पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम कार्यक्रम अधिकारियों की कार्यकुशलता, प्रशासनिक दक्षता एवं नेतृत्व क्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. कपिल शर्मा, नोडल अधिकारी, माई भारत पोर्टल का विशेष सहयोग रहा। कार्यशाला में बुन्देलखण्ड क्षेत्र के विभिन्न जनपदों से कार्यक्रम अधिकारियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राम प्रकाश यादव अपने सहयोगी कार्यक्रम अधिकारियों के साथ प्रशिक्षण में उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त महोबा, ललितपुर, उरई, जालौन, पिरौना, चिरगांव, कोंच, गरौठा, राठ तथा अन्य क्षेत्रों के विभिन्न महाविद्यालयों के राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। साथ ही ऑनलाइन माध्यम से झाँसी मंडल के सभी जनपदों के कार्यक्रम अधिकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े रहे। इस व्यापक सहभागिता ने कार्यशाला को क्षेत्रीय स्तर पर एक प्रभावी मंच प्रदान किया, जहाँ कार्यक्रम अधिकारियों ने राष्ट्रीय सेवा योजना के सफल संचालन, पर्यावरण संरक्षण, वित्तीय प्रबंधन, प्रलेखन एवं डिजिटल रिपोर्टिंग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों का आदान-प्रदान किया।
इस अवसर पर आदर्श राजपूत, फैसल उस्मानी, दीपिका राजपूत, शुभ शाक्य, विकास, प्रियसा सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं कार्यक्रम अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रतिभागियों ने समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला से कार्यक्रम अधिकारियों की प्रशासनिक एवं कार्यात्मक दक्षता में वृद्धि होगी, राष्ट्रीय सेवा योजना गतिविधियों के संचालन में गुणवत्ता एवं पारदर्शिता को बल मिलेगा तथा विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों में NSS कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को नई दिशा प्राप्त होगी।
