दमकल की पहुंच 6वीं मंजिल तक ही सीमित
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन शुरुआती राहत कार्यों में बड़ा संकट सामने आया। दमकल की साधारण गाड़ियों का पानी केवल 5 से 6वीं मंजिल तक ही पहुंच सका, जबकि आग 12वीं मंजिल पर विकराल रूप ले चुकी थी। इसी दौरान मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी देखने को मिली। एक व्यक्ति ने कहा कि सिस्टम की स्थिति बेहद खराब है और यह केवल “गमलों में पानी डालने जैसा” प्रतीत हो रहा है।
हाइड्रोलिक क्रेन से पाया गया काबू
स्थिति बिगड़ते देख फायर विभाग ने हाइड्रोलिक क्रेन को मौके पर बुलाया। इसके बाद ऊंचाई पर पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू हुई। करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया। राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली।
अफरा-तफरी में खाली कराई गई सोसाइटी
आग लगते ही सोसाइटी में अफरा-तफरी मच गई। लोग सीढ़ियों के जरिए बाहर भागने लगे। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के टावर भी खाली करा दिए गए। फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय होने के कारण एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
एक और घटना: PG रेस्टोरेंट में आग, 15 लोग सुरक्षित निकाले गए
इसी बीच सेक्टर-52 स्थित ई-3 शताब्दी विहार के एक PG और रेस्टोरेंट में भी आग लग गई। प्रारंभिक जांच में आग का कारण फ्रीजर में शॉर्ट सर्किट बताया गया। दमकल विभाग ने समय रहते कार्रवाई करते हुए ऊपर फंसे 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
हाईराइज फायर सेफ्टी की हकीकत उजागर
नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में ऊंची इमारतों के लिए फायर सेफ्टी सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में उपलब्ध हाइड्रोलिक उपकरण अधिकतम 42 मीटर तक ही प्रभावी हैं, जबकि कई इमारतें 30 से 80 मंजिल तक पहुंच चुकी हैं। फायर विभाग भविष्य में 72 और 102 मीटर क्षमता वाली मशीनें लाने की योजना पर काम कर रहा है, लेकिन फिलहाल यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा रही।
यह घटना स्पष्ट करती है कि तेजी से बढ़ते शहरी विकास के मुकाबले आपातकालीन सेवाओं की क्षमता अभी पीछे है। नोएडा की यह आग केवल एक हादसा नहीं, बल्कि हाईराइज सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी है।
