बैठक के दौरान साझा समृद्धि, आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य की विकास योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल को भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध केवल कूटनीतिक दायरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों के बीच गहरे सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध भी मौजूद हैं।
मुलाकात के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में भारत और नेपाल को विकास, व्यापार, निवेश और संपर्क बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, सड़क संपर्क, रेलवे, शिक्षा, पर्यटन और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विकास को नई गति दे सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि नेपाल की नई राजनीतिक परिस्थितियों और नेतृत्व के साथ भारत के संबंध और अधिक मजबूत होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच दशकों से चली आ रही मित्रता आने वाले समय में नई उपलब्धियों का आधार बनेगी। भारत लगातार नेपाल के विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग करता रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव दोनों देशों के संबंधों पर देखा गया है।
रबि लामिछाने की भारत यात्रा के दौरान कई वरिष्ठ भारतीय नेताओं के साथ भी उनकी मुलाकातें हुई हैं। इन बैठकों में लोकतांत्रिक व्यवस्था, सुरक्षा सहयोग, राजनीतिक संवाद और आपसी हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। माना जा रहा है कि इन मुलाकातों से दोनों देशों के राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा, सांस्कृतिक समानताएं और लोगों के बीच गहरे संबंध दोनों देशों की साझेदारी को विशेष बनाते हैं। हर वर्ष लाखों लोग धार्मिक, व्यापारिक और सामाजिक कारणों से दोनों देशों के बीच आवागमन करते हैं। यही कारण है कि द्विपक्षीय संबंधों को केवल राजनीतिक दृष्टि से नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत और नेपाल के बीच बढ़ता संवाद क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए सकारात्मक संकेत है। दोनों देशों की नेतृत्व स्तर की यह मुलाकात भविष्य में सहयोग के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है और पारंपरिक मित्रता को और अधिक मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।
