प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल ही में अपनी नीदरलैंड यात्रा के दौरान उन्हें एक विशेष समारोह में इन प्राचीन ताम्र-पत्रों को भारत को सौंपे जाने का अवसर मिला। इस दौरान नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह क्षण इसलिए भी विशेष था क्योंकि देश-विदेश से लगातार लोगों के संदेश प्राप्त हो रहे हैं, जिसमें भारतीय समुदाय और विशेष रूप से तमिल समाज ने इस ऐतिहासिक वापसी पर गहरा उत्साह और गर्व व्यक्त किया है।
इन ताम्र-पत्रों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि यह कुल 24 पट्टिकाएं हैं, जिनमें 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टिकाएं शामिल हैं। ये मुख्य रूप से चोल शासक राजराजा चोला प्रथम और उनके पुत्र राजेंद्र चोला प्रथम से जुड़े ऐतिहासिक विवरणों को दर्शाती हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण घटना का उल्लेख है जिसमें आनइमंगलम गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने की जानकारी मिलती है, जो उस समय की धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक संरचना को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन ताम्र-पत्रों में चोल साम्राज्य की समुद्री शक्ति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का भी विस्तृत उल्लेख मिलता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि चोल वंश का प्रभाव केवल भारतीय उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं था, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों के साथ भी उनके व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत थे। यह भारत के प्राचीन समुद्री इतिहास और वैश्विक संपर्कों का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि चोल साम्राज्य की यह ऐतिहासिक धरोहर भारत की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है और इसे संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। सरकार की ओर से देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने और उन्हें वापस लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत भी प्राचीन ऐतिहासिक दस्तावेजों और शिलालेखों की खोज और संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के मल्हार क्षेत्र में हाल ही में हुई एक महत्वपूर्ण खोज का भी उल्लेख किया, जहां तीन दुर्लभ ताम्र-पत्र प्राप्त हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये शिलालेख छठी और सातवीं शताब्दी के बीच के हैं और पांडुवंशी शासक महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से संबंधित माने जाते हैं। इनमें प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा का उपयोग किया गया है, जो उस समय की शासन व्यवस्था, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक जीवन को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक खोजें न केवल भारत की प्राचीन सभ्यता को समझने में मदद करती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि हमारा इतिहास कितना समृद्ध और व्यापक रहा है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और उसके प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
