सूत्रों के अनुसार, राहत कार्यों की समीक्षा और प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरण से जुड़ी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहत आयुक्त से तलब की थी। लेकिन जब अपेक्षित रिपोर्ट समय पर नहीं मिली, तो जांच में यह सामने आया कि राहत आयुक्त डॉ. यशोद 15 मई से 23 मई तक लगभग 9 दिनों के लिए विदेश यात्रा पर थे। इससे आपदा प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
13 मई को प्रदेश में आए आंधी-तूफान ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी। पेड़ गिरने, तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं में सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए और 117 लोगों की जान चली गई थी। ऐसे संवेदनशील समय में शीर्ष राहत अधिकारी के अनुपस्थित रहने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर असंतोष गहराता जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव एसपी गोयल से सीधे जवाब तलब किया है। यह माना जा रहा है कि यह पहली बार है जब किसी वरिष्ठ अधिकारी की छुट्टी मंजूरी को लेकर सीएम ने सीधे मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है। सीएम ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जब प्रदेश आपदा जैसी स्थिति से गुजर रहा था, तब इतने महत्वपूर्ण पद पर तैनात अधिकारी की विदेश यात्रा को कैसे मंजूरी दी गई।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहले ही बिना आवश्यक कारण के विदेश यात्राओं से बचने की अपील की गई थी, ऐसे में राज्य में गंभीर आपदा के दौरान इस तरह की अनुमति देना उचित नहीं था।
वहीं, मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा है कि राहत आयुक्त की विदेश यात्रा की अनुमति प्रधानमंत्री की अपील से पहले ही स्वीकृत कर दी गई थी, इसलिए उस समय नियमों के तहत उन्हें रोका नहीं जा सकता था।
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और आपदा प्रबंधन व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में पहले ही प्राकृतिक आपदा से भारी नुकसान हो चुका है और अब इस विवाद ने सरकार के भीतर जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
