निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों द्वारा पिलर के लिए की जा रही खुदाई में करीब 3 से 4 फीट नीचे एक लोहे जैसी भारी वस्तु दिखाई दी। शुरुआत में इसे सामान्य कबाड़ समझा गया, लेकिन जब इसकी बनावट पर ध्यान दिया गया तो यह बम जैसा प्रतीत हुआ। इसके बाद मजदूरों ने तुरंत काम रोक दिया और मकान मालिक को इसकी जानकारी दी।
मकान मालिक द्वारा सूचना दिए जाने के बाद खमरिया थाना पुलिस और बम निरोधक दस्ता (BDS) मौके पर पहुंचा। जैसे ही जांच शुरू हुई, पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया और स्थानीय लोगों को सुरक्षित दूरी पर हटाया गया।
प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई कि यह एक जिंदा अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस (UXO) बम है, जिसका वजन 12 किलो से अधिक बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी मारक क्षमता लगभग 50 मीटर तक हो सकती है, जिससे इसकी गंभीरता और खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पुलिस के अनुसार यह बम जिस स्थान पर मिला है, वह आयुध निर्माणी फैक्ट्री खमरिया से लगभग 6 किलोमीटर दूर है। यह क्षेत्र पहले भी सैन्य गतिविधियों और परीक्षणों से जुड़ा रहा है, ऐसे में बम के यहां मौजूद होने की संभावना जताई जा रही है।
बम मिलने की खबर फैलते ही मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी।
खमरिया थाना पुलिस ने तत्काल सेना के बम निरोधक विशेषज्ञों को सूचना दी। इसके बाद बम को सावधानीपूर्वक कब्जे में लेकर सेना के अधिकारियों को सौंप दिया गया। अब सेना की टीम द्वारा इसे सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज करने की प्रक्रिया की जा रही है।
थाना प्रभारी राजकुमार खटीक ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए गए हैं और किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचाव सुनिश्चित किया गया है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बम यहां तक कैसे पहुंचा और क्या इसके पीछे कोई ऐतिहासिक या तकनीकी कारण है।
इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जमीन के भीतर छिपे ऐसे विस्फोटक कितने बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं, और समय रहते उनकी पहचान कितनी जरूरी है।
