5 फरवरी को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च की गई यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन का एक बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। इस मॉडल को तकनीक और सहकारिता के अनोखे संगम के रूप में देखा जा रहा है, जहां ड्राइवर केवल सेवा प्रदाता नहीं बल्कि प्लेटफॉर्म के सह-मालिक हैं।
भारत टैक्सी का सबसे बड़ा आकर्षण इसका जीरो कमीशन मॉडल है। कंपनी के अनुसार, राइड से होने वाली 100 प्रतिशत कमाई सीधे ड्राइवरों के खाते में जाती है, जिससे उनकी मासिक आय में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्लेटफॉर्म से जुड़े ड्राइवरों का कहना है कि पारंपरिक एग्रीगेटर मॉडल की तुलना में यहां कमाई अधिक पारदर्शी और स्थिर है। वहीं यात्रियों को भी फायदा मिल रहा है क्योंकि किराया औसतन 15 प्रतिशत तक कम है और डायनेमिक प्राइसिंग जैसी अनिश्चितताओं से राहत मिली है।
अहमदाबाद रिक्शा चालक एकता यूनियन के प्रतिनिधियों के अनुसार, इस मॉडल ने ड्राइवरों के आत्मसम्मान और आर्थिक स्थिति दोनों को मजबूत किया है। आवेदन प्रक्रिया भी सरल बताई जा रही है, जिसमें 12 घंटे के भीतर अप्रूवल मिलने का दावा किया गया है।
कंपनी ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गुजरात पुलिस के साथ SOS इंटीग्रेशन लागू किया है, जिससे आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। इसके अलावा सोमनाथ और द्वारकाधीश जैसे तीर्थ स्थलों के लिए विशेष रूट कनेक्टिविटी भी शुरू की गई है।
भारत टैक्सी ने अब तक 10,000 से अधिक ड्राइवरों को डिजिटल और सॉफ्ट स्किल्स का प्रशिक्षण दिया है और मेट्रो, एयरपोर्ट तथा ट्रांजिट सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन के जरिए अपने नेटवर्क को लगातार विस्तार दे रही है।
