एयरटेल ने स्पष्ट किया है कि उसकी यह प्रायोरिटी सर्विस पूरी तरह कंटेंट-न्यूट्रल है और इसमें किसी भी ऐप या वेबसाइट के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। न तो किसी ऐप को ब्लॉक किया जाता है, न उसकी स्पीड कम की जाती है और न ही किसी को अतिरिक्त प्राथमिकता देकर अन्य यूजर्स को नुकसान पहुंचाया जाता है।
कंपनी के अनुसार, 5G क्षमता का वर्तमान उपयोग पीक टाइम में लगभग 38% है, जिसमें प्रायोरिटी पोस्टपेड ट्रैफिक की हिस्सेदारी बेहद कम है। इसलिए प्रीपेड यूजर्स के लिए पर्याप्त नेटवर्क क्षमता हमेशा उपलब्ध रहती है और उनकी सर्विस क्वालिटी प्रभावित नहीं होगी।
एयरटेल ने यह भी तर्क दिया है कि अगर 5G नेटवर्क स्लाइसिंग जैसी तकनीकों के उपयोग पर रोक लगाई गई, तो भारत में 6G तकनीक के विकास की संभावनाओं पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक भविष्य की उन्नत कनेक्टिविटी का आधार है।
हाल ही में लॉन्च हुई इस सर्विस के तहत पोस्टपेड यूजर्स को भीड़भाड़ वाले इलाकों में बेहतर नेटवर्क और कम कॉल ड्रॉप जैसी सुविधाएं देने का दावा किया गया है। यह सेवा 449 रुपये के शुरुआती प्लान से उपलब्ध है।
नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियां किसी भी वेबसाइट या ऐप के साथ भेदभाव नहीं कर सकतीं, न ही किसी को पैसे लेकर तेज या धीमा इंटरनेट दे सकती हैं। इसी को लेकर इस नई सर्विस पर बहस तेज हो गई है।
