पांडे का मानना है कि अगर नेपाल सरकार यह कदम उठाती है, तो देश को एक बड़े “शादी डेस्टिनेशन” के रूप में विकसित किया जा सकता है। भारत जैसे विशाल बाजार से आने वाले पर्यटकों के जरिए नेपाल न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा दे सकता है, बल्कि होटल, ट्रैवल और स्थानीय कारोबार को भी मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल में नियम और प्रक्रियाएं जितनी सरल होंगी, उतना ही अधिक विदेशी पर्यटक आकर्षित होंगे। खासतौर पर भारतीय यात्रियों के लिए सीमाओं पर प्रक्रियाएं आसान बनाने और वाहनों के प्रवेश को सरल करने की भी आवश्यकता है।
पूर्व वित्त मंत्री ने सुझाव दिया कि नेपाल को भारत और चीन जैसे बड़े देशों को ध्यान में रखते हुए बड़े पर्यटन पैकेज तैयार करने चाहिए। उनका कहना है कि इन देशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या बहुत अधिक है और सही रणनीति अपनाकर नेपाल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है।
फिलहाल नेपाल में विदेशी यात्रियों को सीमित मात्रा में सोने और चांदी के गहने बिना कस्टम ड्यूटी के लाने की अनुमति है, लेकिन यह शर्त रहती है कि उन्हें निजी उपयोग के बाद वापस ले जाया जाए। इसी व्यवस्था को और लचीला बनाने की मांग अब तेज हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल पहले से ही प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत के कारण लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। भारत से हर साल लाखों लोग नेपाल की यात्रा करते हैं। ऐसे में यदि नियमों में ढील दी जाती है, तो यह देश के पर्यटन सेक्टर के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।
सुरेंद्र पांडे के इस सुझाव को नेपाल की आर्थिक रणनीति में एक नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में भारत-नेपाल पर्यटन संबंधों को और मजबूत कर सकता है।
