हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संकेत दिए कि नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करने के बाद अब सरकार का अगला फोकस अवैध घुसपैठ को पूरी तरह रोकने पर है। उन्होंने कहा कि वर्षों से सीमावर्ती इलाकों में चल रही घुसपैठ अब राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी है और इसे रोकने के लिए कठोर और व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है। उनके अनुसार देश अब नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है और अब सुरक्षा एजेंसियों को उसी दृढ़ता के साथ सीमा सुरक्षा पर ध्यान देना होगा।
सरकार का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में अवैध प्रवासन के कारण कई क्षेत्रों की जनसंख्या संरचना में तेजी से बदलाव आया है। इसे देखते हुए ‘हाई-पावर्ड डेमोग्राफी मिशन’ के तहत सुरक्षा एजेंसियों, राज्य सरकारों और प्रशासनिक तंत्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाएगा। इस मिशन में सीमा सुरक्षा बल की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठ के संभावित क्षेत्रों की विशेष जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि निगरानी और कार्रवाई को और मजबूत बनाया जा सके।
बताया जा रहा है कि इस मिशन के तहत सीमाओं पर आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी। सीमा पर स्मार्ट निगरानी, मजबूत बाड़बंदी और संदिग्ध गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखने जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा। सरकार की योजना पड़ोसी देशों के साथ वापसी समझौतों को और प्रभावी बनाने की भी है ताकि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान और वापसी की प्रक्रिया तेज हो सके।
गृह मंत्री अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मिशन में केवल सीमा सुरक्षा एजेंसियां ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय अधिकारियों की भी सक्रिय भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर से लेकर पुलिस थाना स्तर तक सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा ताकि घुसपैठियों की पहचान और कार्रवाई में किसी प्रकार की ढिलाई न रहे।
सरकार जल्द ही त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल जैसे प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक भी करने जा रही है। इस बैठक में एक संयुक्त सुरक्षा रणनीति तैयार की जाएगी ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ को प्रभावी तरीके से रोका जा सके। केंद्र सरकार का मानना है कि राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय के बिना इस चुनौती से पूरी तरह नहीं निपटा जा सकता।
इसके अलावा सरकार अगले साल ‘स्मार्ट बॉर्डर’ परियोजना शुरू करने की तैयारी में है। इस परियोजना के तहत पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगने वाली लगभग 6,000 किलोमीटर लंबी सीमा को अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक से लैस किया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कदम देश की सुरक्षा को नई मजबूती देगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के अवैध जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिशों को विफल करने में मदद करेगा।
