जांच के दौरान सामने आया कि इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन टीआरएफ की भूमिका थी, जिसने शुरुआत में जिम्मेदारी ली थी लेकिन बाद में अपने बयान से पीछे हट गया। जांच एजेंसियों ने पाया कि हमले को तीन आतंकियों ने अंजाम दिया था, जिनकी पहचान फैसल जट्ट, हबीब ताहिर और हमजा अफगानी के रूप में हुई। इसके अलावा इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड सज्जाद जट्ट बताया गया है, जिसने हमले की रणनीति तैयार की थी।
चार्जशीट के अनुसार आतंकियों ने बैसरन पार्क जैसे सुनसान और रणनीतिक स्थान को जानबूझकर चुना, जहां सुरक्षा व्यवस्था कमजोर थी और कोई सीधा सीसीटीवी कवरेज नहीं था। हमले से पहले आतंकियों ने इलाके की रेकी की और स्थानीय मददगारों के जरिए उन्हें लॉजिस्टिक सपोर्ट मिला। जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने पर्यटकों को रोककर उनका धर्म पूछा और जो लोग उनकी मांगों पर खरे नहीं उतरे, उन्हें गोली मार दी गई।
गवाहों के बयान के अनुसार हमलावर लगातार लोगों से कलमा पढ़ने के लिए कह रहे थे और कई लोगों को बेहद नजदीक से गोली मारी गई। इस दौरान आतंकियों ने बार-बार ऐसे नारे और शब्दों का इस्तेमाल किया जो यह दर्शाते हैं कि उनका उद्देश्य सिर्फ हत्या नहीं बल्कि दहशत फैलाना भी था। जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने हमले के दौरान अलग-अलग पोजिशन लेकर पूरे इलाके को घेर लिया था ताकि किसी को भागने का मौका न मिले।
चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आतंकियों ने हमले के लिए आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया, जिसमें M-4 कार्बाइन और AK-47 शामिल थे। पहले जिपलाइन वाले हिस्से से गोली चलाई गई और उसके बाद पूरे इलाके में अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई। कुछ मिनटों में ही पूरा पर्यटन स्थल चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया।
जांच एजेंसियों ने स्थानीय लोगों और गवाहों से पूछताछ के आधार पर यह भी पाया कि आतंकियों को इलाके की पूरी जानकारी स्थानीय मददगारों से मिली थी। कुछ लोगों ने उन्हें खाना, ठहरने की जगह और मार्गदर्शन तक उपलब्ध कराया, जिससे उन्हें हमला करने में आसानी हुई। बाद में इन्हीं मददगारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।
चार्जशीट में यह भी दर्ज है कि हमले के बाद आतंकियों ने मौके से भागते समय भी कई लोगों को रोका और उनसे पहचान पूछी। कई गवाहों ने बताया कि आतंकियों का व्यवहार बेहद संगठित और योजनाबद्ध था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई अचानक की गई वारदात नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी।
इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों ने फॉरेंसिक साक्ष्यों, घटनास्थल की मैपिंग और सैकड़ों गवाहों के बयान के आधार पर चार्जशीट तैयार की है। अब यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है, लेकिन इस खुलासे ने एक बार फिर देश को उस दर्दनाक घटना की याद दिला दी है जिसने सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
