नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अपने पांच देशों (यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) के सफल दौरे से लौटते ही सीधे ऐक्शन मोड (Action mode) में आ गए हैं। गुरुवार (21 मई) को दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) की एक बेहद अहम और लंबी बैठक हुई। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक की गूंज बहुत तेज है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर मंत्रियों के कामकाज का ‘रिपोर्ट कार्ड’ खोलकर रख दिया गया। एनडीए-3 सरकार (NDA-3 Government) के दो साल पूरे होने से ठीक पहले हुई इस मिड-टर्म समीक्षा ने मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की अटकलों को हवा दे दी है।
किस आधार पर बनी ‘टॉप-5’ और ‘बॉटम-5’ की लिस्ट?
सूत्रों के मुताबिक, यह करीब चार घंटे चली बैठक केवल एक सामान्य चर्चा नहीं थी, बल्कि इसमें मंत्रालयों के परफॉरमेंस का बारीकी से ऑडिट किया गया। बैठक में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने विभिन्न सुधारों और मंत्रालयों के कामकाज पर अपना विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।
मंत्रालयों की रैंकिंग तय करने के लिए मुख्य रूप से दो पैमानों को आधार बनाया गया:
– फाइलों का निस्तारण
– मंत्रालयों में सरकारी फाइलें कितनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
– पब्लिक ग्रीवांस (जनता की शिकायतें):
– आम लोगों की शिकायतों को सुलझाने में मंत्रालय का रवैया कितना सुस्त या फुर्तीला है।
इन्हीं मानकों के आधार पर सबसे अच्छा काम करने वाले ‘टॉप-5’ और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले ‘बॉटम-5’ मंत्रालयों की एक स्पष्ट सूची (रैंकिंग) बैठक में पेश की गई। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर इन खराब प्रदर्शन वाले मंत्रियों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन यह लिस्ट सामने आने के बाद कई मंत्रियों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
‘बॉटम-5’ वाले मंत्रियों को पीएम की सीधी चेतावनी
जिन मंत्रालयों का प्रदर्शन रैंकिंग में निचले स्तर पर रहा, उनके लिए प्रधानमंत्री का संदेश बिल्कुल साफ था। निचले पायदान वाले मंत्रालयों को अपने कामकाज के तरीके में तुरंत सुधार लाने और जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने की सख्त हिदायत दी गई है। पीएम ने जोर देकर कहा कि फैसले तेजी से लिए जाने चाहिए, उत्पादकता बढ़ाई जानी चाहिए और फाइलों को बिना किसी लालफीताशाही के क्लियर किया जाना चाहिए।
क्या जल्द होगा मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल?
आगामी 9 जून 2026 को मोदी सरकार का तीसरा कार्यकाल (NDA-3) अपने दो साल पूरे कर रहा है। सरकार की इस दूसरी वर्षगांठ से पहले सभी केंद्रीय मंत्रियों को दिल्ली में ही मौजूद रहने का जो निर्देश दिया गया था, उसने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है।
बैठक में जिस तरह से ‘रिपोर्ट कार्ड’ के आधार पर मंत्रालयों के प्रदर्शन को आंका गया है, उससे यह चर्चा जोरों पर है कि प्रधानमंत्री जल्द ही अपनी टीम में एक बड़ा बदलाव कर सकते हैं। यह माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों का परफॉरमेंस उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, उनकी कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है या उनके विभाग बदले जा सकते हैं। वहीं, अच्छा काम करने वाले युवा चेहरों का कद बढ़ाया जा सकता है।
‘सुधार ऐसे हों जो जनता की जिंदगी आसान बनाएं’
इस बैठक में कृषि, श्रम, सड़क परिवहन, कॉर्पोरेट मामले, विदेश, वाणिज्य और ऊर्जा सहित कई प्रमुख मंत्रालयों ने पिछले दो वर्षों में किए गए अपने कामों का ब्योरा दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों और शीर्ष नौकरशाहों को दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार का काम लोगों की जिंदगी में बेवजह दखल देना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करना है।
उन्होंने ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर फोकस करते हुए कहा कि हर नए सुधार और पहल का अंतिम लक्ष्य आम नागरिक के जीवन को आसान बनाना होना चाहिए। पीएम ने मंत्रियों को यह भी याद दिलाया कि ‘विकसित भारत 2047’ महज़ कोई राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह सरकार का देश के प्रति अटूट कमिटमेंट है।
