कोर्ट ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
एक ही केस में दोबारा संज्ञान (Second Cognizance) लेना कानूनन स्वीकार्य नहीं है
यदि ट्रायल पहले से चल रहा है, तो पुलिस को आगे की जांच से पहले अदालत की अनुमति लेनी होगी
बिना अनुमति दाखिल की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट कानूनी सवालों के घेरे में आएगी
पूरा मामला क्या था?
वर्ष 2021 में अंबेडकरनगर में मामला दर्ज हुआ था
शुरुआती चार्जशीट में हत्या की धारा नहीं लगाई गई थी
बाद में पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर धारा 302 और 201 IPC जोड़ते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी गई
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि:
आगे की विवेचना से पहले ट्रायल कोर्ट से अनुमति नहीं ली गई
यह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के खिलाफ है
सरकार ने क्या माना?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह स्वीकार किया गया कि:
एसपी के निर्देश पर आगे की जांच हुई
लेकिन ट्रायल कोर्ट से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी
इसके बाद हाई कोर्ट ने:
29 अप्रैल 2023 की सप्लीमेंट्री चार्जशीट
3 फरवरी 2026 का सेकेंड कॉग्निजेंस ऑर्डर
13 फरवरी 2026 का डिस्चार्ज ऑर्डर
तीनों को निरस्त कर दिया।
फैसले का महत्व
यह निर्णय इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे:
पुलिस जांच प्रक्रिया में न्यायिक निगरानी मजबूत होगी
एक ही केस में बार-बार कार्रवाई पर रोक लगेगी
आरोपी के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी
हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां कानून के मुताबिक दोबारा उचित प्रक्रिया अपनाकर कार्रवाई कर सकती हैं।
