दवा व्यापारियों ने शहर के सुगन चौराहे पर एकत्रित होकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। इसके बाद सभी व्यापारी बाइक रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।
जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रद्युम्न जैन ने कहा कि बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधानों के ऑनलाइन दवा बिक्री लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे छोटे मेडिकल व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना वैध चिकित्सकीय सलाह और बिना प्रमाणित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की होम डिलीवरी कर रहे हैं, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
एसोसिएशन के सचिव राकेश शर्मा ने कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद कई कंपनियां लंबे समय से अवैध तरीके से कारोबार कर रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री पूरी तरह रोकी जाए।
प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने ऑनलाइन कंपनियों की भारी छूट और प्रीडेटरी प्राइसिंग नीति का भी विरोध किया। उनका कहना था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बड़े डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल स्टोरों का कारोबार खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। ज्ञापन में GSR 817(E) और GSR 220(E) अधिसूचनाओं को वापस लेने की मांग भी उठाई गई।
मेडिकल स्टोर बंद रहने से कई मरीजों को जरूरी दवाओं के लिए भटकना पड़ा, लेकिन जिला प्रशासन ने पहले से वैकल्पिक स्वास्थ्य व्यवस्थाएं लागू कर दी थीं। प्रशासन के निर्देश पर जन औषधि केंद्र, निजी अस्पतालों में संचालित मेडिकल स्टोर और शासकीय अस्पतालों की दवा दुकानें खुली रहीं। सिविल अस्पताल, कैंट चौराहा और भगत सिंह चौक स्थित जन औषधि केंद्रों पर मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा आशीर्वाद हॉस्पिटल, सहयोग नर्सिंग होम, बालाजी नर्सिंग होम, ममता नर्सिंग
होम और एजेएस हॉस्पिटल की मेडिकल दुकानें भी संचालित रहीं।
दवा व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
