प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में बोगी के अंदर तेज जलने की गंध महसूस हुई, जिसे पहले यात्रियों ने गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन कुछ ही क्षणों में धुआं तेजी से फैलने लगा और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। जैसे ही आग की लपटें दिखाई दीं, यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सामान छोड़कर बाहर की ओर भागने लगे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे कर्मचारियों, आरपीएफ और दमकल विभाग को तुरंत सूचना दी गई। सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और यात्रियों को तेजी से सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत कार्य के दौरान आसपास की बोगियों को भी खाली कराया गया ताकि किसी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, आग पर नियंत्रण पाने के लिए लगभग 20 से अधिक कर्मचारी लगातार प्रयासरत रहे। रेलवे की पाइपलाइन और दमकल की सहायता से दोनों ओर से पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया गया। शुरुआती 30 मिनट में बाहरी हिस्से की आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया, लेकिन कोच के अंदर आग को पूरी तरह बुझाने में लगभग एक घंटे का समय लग गया। इस दौरान आग कई बार भड़कती रही, लेकिन कर्मचारियों ने स्थिति को नियंत्रित बनाए रखा।
घटना के बाद संबंधित बोगी को ट्रेन से अलग कर दिया गया और पूरे स्टेशन परिसर को खाली कराया गया। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर प्रवेश भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी भी यात्री के घायल होने या जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली।
प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि रेलवे प्रशासन ने विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि घटना की पूरी जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
इस घटना ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन समय रहते की गई त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। यात्रियों की सूझबूझ और रेलवे कर्मचारियों की तत्परता के कारण स्थिति नियंत्रण में आ सकी और एक बड़ा नुकसान होने से बच गया।
