विशेषज्ञों के अनुसार, मां बनने के बाद ज्यादातर महिलाओं का पूरा ध्यान बच्चे की देखभाल में चला जाता है। ऐसे में लगातार थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, कमजोरी, मूड स्विंग्स, डिप्रेशन या ठंड ज्यादा लगने जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि यही संकेत थायरॉयड डिसफंक्शन की ओर इशारा कर सकते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि जेस्टेशनल डायबिटीज के दौरान शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिसका असर थायरॉयड ग्लैंड पर भी पड़ सकता है। थायरॉयड शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। ऐसे में इसमें गड़बड़ी होने पर शरीर धीरे-धीरे कई समस्याओं की चपेट में आने लगता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि थायरॉयड की परेशानी अचानक नहीं दिखती, बल्कि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। बिना वजह वजन बढ़ना, ड्राई स्किन, ध्यान लगाने में परेशानी, एंग्जायटी, पीरियड्स अनियमित होना और लगातार कमजोरी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कई महिलाएं इन्हें पोस्ट-प्रेग्नेंसी बदलाव समझकर अनदेखा कर देती हैं, जिससे समस्या गंभीर हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज हुई हो, उन्हें डिलीवरी के बाद भी नियमित हेल्थ चेकअप करवाते रहना चाहिए। खासतौर पर अगर परिवार में डायबिटीज या थायरॉयड की हिस्ट्री हो तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
डॉक्टरों का मानना है कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय-समय पर ब्लड शुगर व थायरॉयड टेस्ट करवाकर भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। क्योंकि मां की सेहत सिर्फ गर्भावस्था तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका असर लंबे समय तक पूरे शरीर पर दिखाई देता है।
