डॉक्टरों ने बताया- शरीर के कई अंग फेल होने का खतर
अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार इतने गंभीर बर्न केस में शरीर की स्थिति तेजी से बिगड़ती है। डॉक्टरों ने बताया कि 99% तक जलने की स्थिति में मरीज के फेफड़े सबसे पहले प्रभावित होते हैं, जिससे सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है।
डॉक्टरों के अनुसार विस्फोट में उठे धुएं और गर्म हवा के कारण लंग इंजरी की संभावना बढ़ जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी, खून की संरचना में बदलाव और “हेमोलिसिस” जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है, जिसमें रक्त कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं और खून पानी जैसा हो जाता है। इसके चलते किडनी फेलियर, लिवर डैमेज और शॉक में जाने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह ऐसी स्थिति है जिसमें मरीज की जान बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
त्वचा के साथ सांस नली भी प्रभावित
विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे मामलों में केवल त्वचा ही नहीं, बल्कि श्वसन तंत्र भी गंभीर रूप से प्रभावित होता है। मरीजों को सांस लेने में भारी कठिनाई होती है और उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा जाता है। शरीर में पानी की कमी, नसों की कार्यक्षमता में गिरावट और संक्रमण का खतरा भी तेजी से बढ़ता है। मरीजों को हाइपोथर्मिया और हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है।
बिहार से आए थे मजदूर, परिवारों में मातम
घायल मजदूरों में कई लोग बिहार से करीब 1500 किलोमीटर दूर काम करने आए थे। हादसे के बाद उनके परिवारों में चिंता और सदमे का माहौल है। कुछ मजदूरों की हालत इतनी गंभीर है कि डॉक्टरों ने उनके जीवित बचने की संभावना को बेहद कम बताया है।
घटना की जांच जारी
जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है, जिसमें बिजली विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और औद्योगिक सुरक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हैं। टीम फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों, विस्फोट के कारणों और नियमों के उल्लंघन की जांच कर रही है।
लापता मजदूरों की तलाश भी जारी
घायलों के बयान के अनुसार दो मजदूर हादसे के बाद से लापता हैं। प्रशासन उनकी तलाश में जुटा हुआ है। वहीं, कई मजदूरों को प्राथमिक उपचार के बाद उनके गृह राज्य भेजा गया है।
देवास का यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 99% तक झुलसे मजदूरों की जिंदगी के लिए डॉक्टरों की जंग जारी है, लेकिन उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।
