यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में ईरान-यूएई तनाव, समुद्री मार्गों में अनिश्चितता और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की चिंता बढ़ी हुई है। भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि उसकी बड़ी ऊर्जा जरूरतें खाड़ी देशों पर निर्भर हैं।
दोनों देशों के बीच बातचीत में एलपीजी सप्लाई, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण, शिपिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। साथ ही रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, यूएई की ओर से भारत में बड़े निवेश प्रस्तावों और ऊर्जा साझेदारी को विस्तार देने पर भी चर्चा हुई है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और गहरे होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की ‘वेस्ट एशिया स्ट्रैटेजी’ का अहम हिस्सा है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच भारत को ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन दोनों को साथ लेकर चलना होगा।
रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के अनुसार, भारत के लिए चुनौती यह है कि वह UAE, ईरान और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखे, क्योंकि यह पूरा क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा और व्यापार का केंद्र है।
