उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में दुनिया तीन बड़े भू-राजनीतिक संकटों का सामना कर रही है, जिनमें पश्चिम एशिया का तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक व कमोडिटी से जुड़े तनाव शामिल हैं। इन परिस्थितियों का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा है, लेकिन भारत अपनी नीतियों और आर्थिक संरचना के कारण इन प्रभावों को काफी हद तक संतुलित करने में सफल रहा है।
गौरव वल्लभ ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुकी है और पिछले एक दशक से अधिक समय में देश ने आर्थिक विकास की मजबूत यात्रा तय की है। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में विभिन्न सरकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और स्टार्टअप एवं स्वरोजगार के क्षेत्र में भी देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत की आयात निर्भरता, विशेष रूप से कच्चे तेल और सोने जैसे क्षेत्रों में, एक चुनौती है, लेकिन सरकार इस दिशा में संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि देश के नागरिक ऊर्जा और संसाधनों की खपत में थोड़ी बचत करें तो विदेशी मुद्रा भंडार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और आर्थिक स्थिरता और मजबूत हो सकती है।
विदेशी मुद्रा भंडार, राजकोषीय घाटा और आर्थिक विकास दर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की वित्तीय स्थिति संतोषजनक है और आने वाले समय में देश की विकास दर और भी बेहतर हो सकती है। उनके अनुसार, भारत की आर्थिक नीति का मूल उद्देश्य स्थिरता के साथ विकास को आगे बढ़ाना है, जिससे वैश्विक अस्थिरताओं का असर कम से कम हो सके।
उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत की आपूर्ति प्रणाली मजबूत है और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद देश में आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं हुई है। भारत की विदेश नीति और रणनीतिक संबंधों ने भी इस स्थिरता को बनाए रखने में मदद की है।
राजनीतिक सवालों के जवाब में उन्होंने विपक्ष पर भी टिप्पणी की और कहा कि देशहित के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्रगति सभी नागरिकों के सहयोग से ही संभव है और हर वर्ग को मिलकर देश की आर्थिक मजबूती में योगदान देना चाहिए।
अंत में उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक मजबूत स्थिति में उभरेगा और विकास की गति को बनाए रखते हुए दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।
