सरकार का मानना है कि मौजूदा समय में ईंधन और संसाधनों का संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ राजधानी में एक व्यापक जन-अभियान की शुरुआत की जा रही है, जिसका उद्देश्य केवल सरकारी स्तर पर बदलाव करना नहीं बल्कि आम लोगों को भी इस पहल से जोड़ना है। सरकार का कहना है कि यदि प्रशासन और जनता दोनों मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाएं तो बड़े स्तर पर बचत और सकारात्मक बदलाव संभव हो सकते हैं।
वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था को इस अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है। सरकारी विभागों में सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की योजना तैयार की गई है। साथ ही निजी कंपनियों और संस्थानों से भी अपील की जाएगी कि वे अपने कर्मचारियों को सीमित दिनों के लिए घर से काम करने की सुविधा दें। माना जा रहा है कि इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी, ट्रैफिक का दबाव घटेगा और पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी आएगी।
सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को भी सीमित करने का फैसला लिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों के काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम की जाएगी और जहां संभव होगा वहां सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जाएगी। अगले छह महीनों तक नई पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या हाइब्रिड गाड़ियों की खरीद नहीं की जाएगी। इसके साथ ही कर्मचारियों को मेट्रो और बस जैसे सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई गई है।
राजधानी में मेट्रो स्टेशनों तक पहुंच आसान बनाने के लिए विशेष बस सेवाएं शुरू करने की तैयारी की गई है। इसके अलावा बैठकों और प्रशासनिक गतिविधियों को अधिक से अधिक ऑनलाइन मोड में करने की योजना बनाई जा रही है। विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों से भी ऑनलाइन क्लास और मीटिंग्स को बढ़ावा देने की अपील की गई है, ताकि अनावश्यक यात्रा को कम किया जा सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगले कुछ महीनों तक बड़े सरकारी आयोजन और खर्चीले कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। इसके साथ ही “मेड इन India” उत्पादों को बढ़ावा देने और सरकारी विभागों में स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को प्राथमिकता देने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
ऊर्जा बचत के तहत सरकारी दफ्तरों में बिजली उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। एयर कंडीशनर के तापमान को सीमित रखने और बिजली की अनावश्यक खपत रोकने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
कुल मिलाकर राजधानी में शुरू की गई यह पहल केवल खर्च कम करने का प्रयास नहीं बल्कि एक नई प्रशासनिक सोच का संकेत मानी जा रही है। सरकार इस अभियान के जरिए सादगी, जिम्मेदारी और संसाधनों के संतुलित उपयोग का संदेश जनता तक पहुंचाना चाहती है।
