जानकारी के अनुसार, अस्पताल की करीब 30 से 35 नर्सों ने सरकारी भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन किया है, जो 15 मई को आयोजित होनी है। इनमें से कई नर्सों के परीक्षा केंद्र भोपाल सहित अन्य शहरों में हैं, जिसके चलते उन्हें यात्रा और परीक्षा में शामिल होने के लिए अवकाश की आवश्यकता है।
नर्सों का आरोप है कि उन्होंने प्रबंधन से छुट्टी की मांग की थी, लेकिन इसे स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया गया। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कोई कर्मचारी परीक्षा देने जाता है तो वह अपनी जिम्मेदारी पर जाएगा और ड्यूटी व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।
नर्सों के अनुसार, अस्पताल की नर्सिंग सुपरिटेंडेंट सीबी जॉर्ज की ओर से एक ऑडियो संदेश जारी किया गया है, जिसमें कहा गया कि नियुक्ति के समय परीक्षा के लिए छुट्टी देने का कोई वादा नहीं किया गया था, इसलिए किसी भी प्रकार की छुट्टी या समायोजन संभव नहीं है।
इस स्थिति से नर्सों में नाराजगी के साथ-साथ चिंता भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करना उनका अधिकार है, लेकिन वर्तमान नौकरी में दबाव बनाकर उन्हें परीक्षा से दूर रखने की कोशिश की जा रही है। कई कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अनुपस्थित रहने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और हॉस्टल खाली कराने तक की चेतावनी दी गई है।
हॉस्टल में रहने वाली नर्सों को कथित तौर पर यह संदेश भी दिया गया है कि 14 और 15 मई को किसी भी कर्मचारी को नाइट पास नहीं दिया जाएगा और ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इससे कई नर्सें मानसिक दबाव में हैं और अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।
हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को अलग दृष्टिकोण से देखा है। बॉम्बे हॉस्पिटल के डायरेक्टर का कहना है कि यदि एक साथ बड़ी संख्या में नर्सें छुट्टी पर चली जाती हैं, तो अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित होगी। विशेषकर इमरजेंसी और किडनी यूनिट जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
प्रबंधन का यह भी कहना है कि उन्होंने किसी को परीक्षा देने से रोका नहीं है, लेकिन नियमित अवकाश (सीएल आदि) देना संभव नहीं है क्योंकि इससे अस्पताल संचालन प्रभावित हो सकता है।
Indore में इस विवाद ने स्वास्थ्य सेवाओं में स्टाफ प्रबंधन और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
