नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। पेपर लीक से जुड़े मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार जांच एजेंसियों को अब तक 150 से अधिक अभ्यर्थियों की पहचान मिली है, जिन्हें कथित रूप से लीक हुआ प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था।
जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह पूरा मामला किसी एक जगह तक सीमित नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क के माध्यम से इसे कई राज्यों में फैलाया गया। शुरुआती कड़ी महाराष्ट्र से जुड़ती नजर आई, जहां से प्रश्नपत्र के बाहर आने की बात सामने आई, जिसके बाद यह हरियाणा और अन्य राज्यों तक पहुंचा।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में कई बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई है, जिन्होंने प्रश्नपत्र को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम किया। आरोप है कि डिजिटल माध्यमों और कुछ एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सिस्टम के जरिए प्रश्नपत्र साझा किया गया, जिससे इसकी पहचान और ट्रैकिंग कठिन हो गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर छात्रों को परीक्षा की तैयारी के नाम पर ऐसे प्रश्न दिए गए, जो असली प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते थे। कई मामलों में प्रश्नों की संरचना, भाषा और पैटर्न लगभग समान पाए गए, जिससे यह संदेह और मजबूत हुआ कि पेपर पहले से ही लीक हो चुका था।
इसके अलावा, कुछ एजेंटों और मध्यस्थों की भूमिका भी जांच के घेरे में है, जो कथित रूप से छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने और आर्थिक लेन-देन में शामिल थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग राज्यों के लोग जुड़े हुए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद देशभर के लाखों छात्रों पर बड़ा असर पड़ा है, जिन्होंने महीनों तक इस परीक्षा की तैयारी की थी। परीक्षा रद्द होने से छात्रों में निराशा और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है।
इसी बीच, मामला अब न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया है। परीक्षा को दोबारा कराने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी किसी स्वतंत्र व्यवस्था के तहत करने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही परीक्षा आयोजित करने वाली व्यवस्था की संरचना और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर सबसे पहले कैसे बाहर आया और किन-किन स्तरों पर इसे आगे बढ़ाया गया। कई स्थानों पर पूछताछ और कार्रवाई भी जारी है।
यह पूरा मामला न केवल परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि आधुनिक तकनीक के दौर में पेपर लीक जैसे मामलों को रोकना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। अब सभी की नजरें आगे की जांच और अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।
