नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
अपरा एकादशी 2026 की सही तिथि
वर्ष 2026 में अपरा एकादशी का व्रत 13 मई, बुधवार को रखा जाएगा। उदया तिथि के अनुसार इसी दिन व्रत और पूजा करना शुभ माना गया है। बुधवार को पड़ने के कारण इस बार इस व्रत का महत्व और भी अधिक माना जा रहा है।
वर्ष 2026 में अपरा एकादशी का व्रत 13 मई, बुधवार को रखा जाएगा। उदया तिथि के अनुसार इसी दिन व्रत और पूजा करना शुभ माना गया है। बुधवार को पड़ने के कारण इस बार इस व्रत का महत्व और भी अधिक माना जा रहा है।
अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में अपरा एकादशी को अत्यंत फलदायी व्रत माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत सुख, शांति, धन, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ और तीर्थ स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। जो लोग आर्थिक परेशानियों, मानसिक तनाव या जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना गया है।
धार्मिक ग्रंथों में अपरा एकादशी को अत्यंत फलदायी व्रत माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत सुख, शांति, धन, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ और तीर्थ स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। जो लोग आर्थिक परेशानियों, मानसिक तनाव या जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना गया है।
पूजा के नियम
अपरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और मिठाई अर्पित करें।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है:
ॐ नमो भगवते वासुदेवायmathrm{ॐ नमो भगवते वासुदेवाय}ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और लहसुन, प्याज, चावल तथा तामसिक भोजन से दूरी बनानी चाहिए। कई श्रद्धालु निर्जला व्रत भी रखते हैं। जरूरतमंदों को दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और लहसुन, प्याज, चावल तथा तामसिक भोजन से दूरी बनानी चाहिए। कई श्रद्धालु निर्जला व्रत भी रखते हैं। जरूरतमंदों को दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
इन बातों का रखें ध्यान
क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा श्रद्धा से करें
तुलसी पूजा जरूर करें
अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करें
क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा श्रद्धा से करें
तुलसी पूजा जरूर करें
अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया अपरा एकादशी व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि लेकर आता है।
