इस नई तकनीक में वाहन जैसे ही टोल प्लाजा से गुजरेंगे, कैमरे उनके नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे और जुड़े हुए फास्टैग अकाउंट से टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है। यह सिस्टम खास तौर पर उन हाईवे सेक्शंस के लिए तैयार किया गया है जहां अक्सर लंबी कतारें और देरी देखने को मिलती है।
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्रा का समय कम होगा और वाहन लगातार गति में रहेंगे। इससे न सिर्फ यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी। लगातार रुकने और चलने की स्थिति खत्म होने से वाहनों का माइलेज बेहतर होगा और प्रदूषण में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
सरकारी अनुमान के अनुसार इस तकनीक के लागू होने से हर साल बड़ी मात्रा में ईंधन की बचत संभव होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी फायदा मिलेगा क्योंकि माल ढुलाई तेज और अधिक प्रभावी हो जाएगी। इससे सप्लाई चेन सिस्टम में भी सुधार देखने को मिलेगा।
इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से देश के अलग-अलग हिस्सों में लागू किया जा रहा है। शुरुआत कुछ चुनिंदा टोल प्लाजा से की गई है और धीरे-धीरे इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की योजना है। आने वाले समय में बड़ी संख्या में टोल प्लाजा इस डिजिटल सिस्टम से जुड़ जाएंगे।
हालांकि इस नई व्यवस्था में फास्टैग बैलेंस को लेकर यात्रियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी। यदि खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होता है तो ई-नोटिस जारी किया जा सकता है और तय समय सीमा में भुगतान न करने पर अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है।
