असल में, PPF में निवेशक के लिए मैच्योरिटी के बाद तीन मुख्य विकल्प होते हैं। पहला विकल्प होता है कि पूरा पैसा निकालकर खाता बंद कर दिया जाए। दूसरा विकल्प यह होता है कि खाते को आगे बढ़ाकर उसमें नया निवेश जारी रखा जाए। तीसरा विकल्प यह होता है कि खाते को चालू रखा जाए लेकिन उसमें कोई नया योगदान न किया जाए।
अगर कोई निवेशक मैच्योरिटी के बाद खाते को आगे बढ़ाना चाहता है और उसमें नियमित निवेश भी जारी रखना चाहता है, तो इसके लिए उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित बैंक या पोस्ट ऑफिस में जरूरी फॉर्म जमा करना होता है। लेकिन यदि कोई निवेशक यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं करता, तो घबराने की जरूरत नहीं होती।
ऐसी स्थिति में PPF खाता अपने आप 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ता रहता है। यानी खाता बंद नहीं होता और निवेशक का पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है। सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेशकों की लंबी अवधि की बचत सुरक्षित बनी रहे, भले ही वे समय पर औपचारिकता पूरी न कर पाएं।
हालांकि, इस ऑटो एक्सटेंशन की स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह होता है कि निवेशक नए योगदान नहीं कर सकता। यानी खाते में पहले से जमा राशि पर ही ब्याज मिलता रहता है, लेकिन अतिरिक्त निवेश की अनुमति नहीं होती। साथ ही, निवेशक को हर वित्तीय वर्ष में केवल एक बार आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है, जिससे वह जरूरत पड़ने पर अपनी बचत का उपयोग कर सकता है।
PPF पर मिलने वाला ब्याज सरकार द्वारा तय किया जाता है और यह समय-समय पर बदल सकता है। खास बात यह है कि एक्सटेंशन की स्थिति में भी यह ब्याज नियमित रूप से मिलता रहता है, जिससे निवेश की वृद्धि जारी रहती है। यही कारण है कि PPF को लंबी अवधि की सुरक्षित और स्थिर निवेश योजना माना जाता है।
निवेश विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति भविष्य में नियमित रूप से निवेश जारी रखना चाहता है, तो उसे समय पर एक्सटेंशन की प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए। इससे वह नए योगदान का लाभ भी उठा सकता है और कंपाउंडिंग का पूरा फायदा मिल सकता है।
