नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर जंगली जानवरों का खौफ लोगों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। राज्य के अलग-अलग जिलों में तेंदुए के लगातार दिखाई देने और हमलों की घटनाओं ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में दहशत का माहौल बना दिया है। मुरादाबाद, पीलीभीत, कुशीनगर और मेरठ जैसे जिलों से तेंदुए के रिहायशी इलाकों में घुसने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे लोग अपने घरों में भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
मुरादाबाद में हाल ही में तेंदुए के एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने सभी को चौंका दिया। बताया जा रहा है कि तेंदुआ चकमा देकर अपने बच्चों के साथ इलाके से निकल गया, जिससे वन विभाग की टीम भी कुछ देर तक उसे पकड़ नहीं सकी। इस घटना के बाद आसपास के गांवों में लोगों में भय और बढ़ गया है।
पीलीभीत में हालात और भी गंभीर नजर आए, जहां तेंदुए के हमले में कुछ लोग घायल हो गए। दहशत इतनी बढ़ गई कि स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर तेंदुए को रोकने की कोशिश की और उसे कपड़े से बांधने तक की कोशिश की। हालांकि बाद में वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
कुशीनगर और मेरठ में भी तेंदुए के दिखाई देने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे लोग रात के समय घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। कई इलाकों में बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
वन विभाग की टीम लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है और कई जगहों पर तेंदुओं को सुरक्षित रूप से पकड़ने में सफलता भी मिली है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में घटते प्राकृतिक आवास और भोजन की कमी के कारण जंगली जानवर रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में इस स्थिति ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है। खेतों में काम करना, सुबह-शाम की आवाजाही और बच्चों का स्कूल जाना भी अब जोखिम भरा माना जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी जंगली जानवर को देखते ही तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
कुल मिलाकर, यूपी में तेंदुए का बढ़ता आतंक अब एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है, जिसे रोकने के लिए प्रशासन और वन विभाग को और सख्त कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
