इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल छह हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। हाल ही में 22वीं किस्त जारी होने के बाद अब सभी लाभार्थी अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि 23वीं किस्त गर्मियों के बाद यानी जून के अंत या जुलाई 2026 की शुरुआत में जारी हो सकती है।
लेकिन इस बार किस्त जारी होने से पहले प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी गई है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां अपात्र लोग भी इस योजना का लाभ ले रहे थे। इसी को देखते हुए अब पात्रता की जांच को और गहराई से किया जा रहा है। अगर किसी लाभार्थी की जानकारी गलत पाई जाती है, तो उसका नाम सूची से हटाया जा सकता है और पहले दी गई राशि की वसूली भी संभव है।
किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि तीन प्रमुख प्रक्रियाएं पूरी करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। सबसे पहले ई-केवाईसी को अपडेट करना जरूरी है, क्योंकि इसके बिना भुगतान संभव नहीं होगा। इसके अलावा भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन भी अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभार्थी वास्तव में कृषि भूमि का मालिक है। तीसरी महत्वपूर्ण शर्त यह है कि बैंक खाते को आधार से लिंक होना चाहिए और डीबीटी सुविधा सक्रिय होनी चाहिए, तभी राशि सीधे खाते में पहुंच सकेगी।
कई किसान इन औपचारिकताओं को हल्के में ले रहे हैं, लेकिन इसका सीधा असर उनकी अगली किस्त पर पड़ सकता है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि अब किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। योजना का उद्देश्य केवल वास्तविक और पात्र किसानों को लाभ पहुंचाना है, इसलिए सभी रिकॉर्ड का मिलान और सत्यापन लगातार किया जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में इस समय किसान अपने दस्तावेजों की जांच में जुटे हैं ताकि किसी भी तरह की गलती सुधार ली जाए। कई लोग अपने स्टेटस को भी समय-समय पर देख रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका नाम लाभार्थी सूची में बना हुआ है या नहीं।
