कला और परंपरा का अनूठा उत्सव, ‘वाइब्रेंट गुजरात’ 30 अप्रैल से शुरू
झाँसी। गुजरात स्थापना दिवस (01 मई) के पावन अवसर पर ललित कला संस्थान, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी द्वारा दो दिवसीय भव्य कला उत्सव **“वाइब्रेंट गुजरात: कला, संस्कृति और सृजन” (Colors of Culture, Spirit of Creativity)** का आयोजन किया जा रहा है। यह उत्सव 30 अप्रैल से 01 मई तक विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होगा, जिसका उद्देश्य गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला एवं सृजनात्मक अभिव्यक्तियों को एक मंच पर प्रस्तुत करना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन समारोह 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा, जिसमें विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, कला विशेषज्ञों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति अपेक्षित है। इस आयोजन के माध्यम से न केवल कला के विविध आयामों को प्रदर्शित किया जाएगा, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति की विविधता और रचनात्मकता से जोड़ने का प्रयास भी किया जाएगा।

इस दो दिवसीय उत्सव में कई आकर्षक एवं विषयगत ज़ोन तैयार किए गए हैं, जो दर्शकों को गुजरात की सांस्कृतिक यात्रा का अनुभव कराएंगे। इनमें प्रमुख रूप से **“Traditional Art Zone”**, **“Rann of Kutch Experience”**, **“Craft & Textile Corner”** तथा **“Engagement Zone”** शामिल हैं। “Traditional Art Zone” में गुजरात की पारंपरिक चित्रकला, लोक कला एवं सांस्कृतिक प्रतीकों को प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे आगंतुकों को वहां की प्राचीन कला परंपराओं का साक्षात्कार होगा।
“Rann of Kutch Experience” ज़ोन में कच्छ के रण की अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, वहां की जीवन शैली और हस्तशिल्प की झलक देखने को मिलेगी। इस क्षेत्र को विशेष रूप से इस प्रकार सजाया जा रहा है कि दर्शक स्वयं को कच्छ के वातावरण में महसूस कर सकें। वहीं “Craft & Textile Corner” में गुजरात के प्रसिद्ध वस्त्रों, कढ़ाई, बंधनी, पाटोला और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प का प्रदर्शन किया जाएगा, जो राज्य की शिल्प परंपरा की समृद्धि को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त “Engagement Zone” में विभिन्न सहभागिता आधारित गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, जिनमें दर्शक सक्रिय रूप से भाग लेकर कला और संस्कृति से जुड़ सकेंगे। इस पूरे आयोजन के अंतर्गत चित्रकला, पोस्टर निर्माण, रंगोली, गुजराती पाककला, परिधान कला तथा क्राफ्ट वर्क का विस्तृत प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही, विभिन्न स्टॉल्स पर विद्यार्थियों और कलाकारों द्वारा निर्मित कलाकृतियों को बिक्री हेतु भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा को आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाने का अवसर मिलेगा।
इस कला प्रदर्शनी की आयोजक डॉ. श्वेता पांडेय ने कहा कि “यह उत्सव केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि गुजरात की जीवंत सांस्कृतिक आत्मा को अनुभव करने का एक माध्यम है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी और दर्शक कला के माध्यम से उस परंपरा, रंगों और रचनात्मक ऊर्जा को महसूस कर सकें, जो गुजरात की पहचान है। इस आयोजन के जरिए हम युवा प्रतिभाओं को एक ऐसा मंच प्रदान कर रहे हैं, जहां वे अपनी सृजनात्मकता को न केवल प्रदर्शित कर सकें, बल्कि उससे जुड़कर सीख भी सकें। साथ ही, विभिन्न कलाकृतियों की बिक्री के माध्यम से विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित किया जा रहा है।”
गुजरात स्थापना दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय में केवल कला तक ही सीमित न रहकर विविध कार्यक्रमों की भी रूपरेखा तैयार की गई है। इनमें खेलकूद प्रतियोगिताएँ, पारंपरिक **गरबा नाइट्स**, स्वच्छता अभियान, वैक्सीनेशन कार्यक्रम, प्राचीन धरोहर यात्रा तथा पदयात्रा जैसे आयोजन शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक जागरूकता, स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता तथा सांस्कृतिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।
कुल मिलाकर, “वाइब्रेंट गुजरात: कला, संस्कृति और सृजन” उत्सव कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए एक अनूठा अनुभव साबित होगा, जहां वे गुजरात की रंगीन संस्कृति, सृजनात्मकता और परंपराओं का निकट से अवलोकन कर सकेंगे। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम बनेगा, बल्कि भारतीय विविधता में एकता के संदेश को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।
