सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 32 लाख राशन कार्डधारकों ने अब तक E-KYC नहीं कराई है। विभाग को आशंका है कि इनमें बड़ी संख्या में फर्जी या डुप्लीकेट कार्ड शामिल हो सकते हैं। यही वजह है कि सरकार अब इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ देने की दिशा में काम कर रही है। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जो लोग इस प्रक्रिया को नजरअंदाज कर रहे हैं, उन्हें राशन वितरण प्रणाली से बाहर किया जा सकता है।
E-KYC की प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता लाना और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है। कई मामलों में यह सामने आया है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर कई राशन कार्ड बने होते हैं या ऐसे लोग भी लाभ उठा रहे होते हैं जो इसके पात्र नहीं हैं। इससे असली जरूरतमंदों को नुकसान होता है। E-KYC के जरिए आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल सही लोगों को ही सरकारी सहायता मिले।
E-KYC कराने की प्रक्रिया काफी सरल रखी गई है। इसके लिए राशन कार्डधारकों को अपने परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड के साथ नजदीकी राशन दुकान पर जाना होगा। वहां बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिसमें फिंगरप्रिंट या अन्य पहचान के जरिए मिलान किया जाता है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होती है, आपकी E-KYC सफल मानी जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि परिवार के हर सदस्य का सत्यापन जरूरी है, तभी राशन कार्ड पूरी तरह सक्रिय रहेगा।
यदि कोई व्यक्ति 31 अक्टूबर तक E-KYC नहीं कराता है, तो उसका राशन कार्ड निष्क्रिय (Inactive) कर दिया जाएगा। ऐसे में नवंबर से उसे मुफ्त राशन जैसे चावल, नमक और शक्करका लाभ नहीं मिल पाएगा। इतना ही नहीं, बाद में कार्ड को दोबारा सक्रिय कराने के लिए नई प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, जो समय लेने वाली हो सकती है।
खाद्य विभाग ने सभी राशन कार्डधारकों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और जल्द से जल्द E-KYC की प्रक्रिया पूरी कर लें। यह कदम न सिर्फ उनके राशन को सुरक्षित रखेगा, बल्कि पूरे सिस्टम को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में भी मदद करेगा।
