झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि सब्जी की खेती में अंतरसांस्कृतिक कार्यों—जैसे निराई-गुड़ाई, मिट्टी चढ़ाना एवं खरपतवार प्रबंधन के लिए छोटे कृषि उपकरणों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। इन उपकरणों के प्रयोग से न केवल मेहनत कम होती है, बल्कि फसल की उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

डॉ. सिंह ने बताया कि सब्जी फसलों में खरपतवार प्रबंधन के लिए खुरपी, व्हील हो और कोनो वीडर जैसे उपकरण बहुत उपयोगी हैं, जो फसल के बीच उगने वाले अनावश्यक पौधों को हटाकर पोषक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। इसके साथ ही छोटे कल्टीवेटर एवं खुरपी द्वारा मिट्टी को ढीला करने से जड़ों तक ऑक्सीजन का संचार बढ़ता है और लाभकारी सूक्ष्मजीव सक्रिय होते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि मिट्टी की ऊपरी सतह को तोड़ने से नमी संरक्षण होता है, इससे फसलों को आवश्यक पानी लंबे समय तक मिलता रहता है। वहीं, पौधों के पास मिट्टी चढ़ाने से उन्हें सहारा मिलता है और जड़ों का विकास बेहतर होता है।

प्रसार शिक्षा निदेशक ने बताया कि व्हील हो और पावर वीडर जैसे आधुनिक उपकरण हाथ से निराई करने की तुलना में तेज़ कार्य करते हैं, जिससे समय और मजदूरी लागत में कमी आती है।
मुख्य छोटे उपकरणों की उपयोगिता
व्हील हो कतारों में लगी फसलों के लिए प्रभावी है, जबकि कोनो वीडर गीली भूमि में निराई के लिए उपयुक्त है। खुरपी छोटे खेतों एवं किचन गार्डन में सबसे अधिक उपयोगी उपकरण है। लंबी हैंडल वाली कुदाल से खड़े होकर कार्य किया जा सकता है, इससे श्रमिकों को कमर दर्द से राहत मिलती है। वहीं, पावर वीडर व्यावसायिक खेती में समय की लगभग 90 प्रतिशत तक बचत करता है।
किसानों को होंगे कई लाभ
छोटे उपकरणों के प्रयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि, लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण जैसे अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। रसायनों के कम उपयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहता है।
अंत में डॉ. सिंह ने किसानों से अपील की कि वे सही समय पर निराई-गुड़ाई एवं अन्य अंतरसांस्कृतिक कार्यों में इन उपकरणों का उपयोग करें, जिससे सब्जी फसलों की गुणवत्ता और उपज दोनों में सुधार हो सके।
