अशोक लाहिड़ी लंबे समय से भारत की आर्थिक नीति निर्माण प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं और उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। उनके अनुभव को देखते हुए नीति आयोग में उनकी नियुक्ति को सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इस नई जिम्मेदारी के साथ नीति आयोग में कार्यशैली और प्राथमिकताओं में भी बदलाव की उम्मीद की जा रही है। सरकार का फोकस इस समय विकास, निवेश और आर्थिक सुधारों को गति देने पर है, ऐसे में लाहिड़ी की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लाहिड़ी का करियर चार दशकों से अधिक का रहा है, जिसमें उन्होंने मुख्य आर्थिक सलाहकार और विभिन्न वैश्विक वित्तीय संस्थानों के साथ काम किया है। उनकी विशेषज्ञता खास तौर पर वित्तीय नीति और मैक्रो-इकोनॉमिक प्लानिंग में मानी जाती है।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश तेजी से बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल के बीच अपनी विकास रणनीतियों को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। इस संदर्भ में नीति आयोग में उनकी भूमिका नीति निर्माण को और अधिक व्यावहारिक और डेटा आधारित बनाने में मदद कर सकती है।
प्रधानमंत्री से उनकी यह मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे आने वाले समय की नीति दिशा और प्राथमिकताओं के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
