शिक्षकों का कहना है कि दिल्ली मॉडल की तर्ज पर उन्हें भी समर वेकेशन के बदले अर्जित अवकाश दिया जाना चाहिए। दिल्ली में ऐसी व्यवस्था लागू है जहां जनगणना या अन्य प्रशासनिक ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को उनके अवकाश का लाभ बाद में दिया जाता है। इसी आधार पर मध्यप्रदेश के शिक्षक भी समान व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
प्रस्ताव के अनुसार राजधानी भोपाल में करीब दो हजार शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई गई है। यह कार्य गर्मी की छुट्टियों के दौरान होना है जिससे शिक्षकों के समर वेकेशन प्रभावित हो रहे हैं। इसी कारण शिक्षक संगठनों ने इसे अर्जित अवकाश में बदलने की मांग की है।
उपेंद्र कौशल ने बताया कि दिल्ली सरकार के आदेशों के अनुसार जनगणना ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को अवकाश का लाभ दिया जाता है और मध्यप्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। इस मांग को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है।
राज्य में इस वर्ष लगभग साढ़े तीन लाख शिक्षक कार्यरत हैं जिनमें से बड़ी संख्या जनगणना और अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगाई जाती है। वहीं राजधानी के स्कूलों में लगभग चार हजार शिक्षक कार्यरत हैं जिनमें से आधे से अधिक की ड्यूटी इस बार जनगणना कार्य में लगने की संभावना है।
इधर इस मुद्दे पर विरोध भी देखने को मिल रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी जनगणना और अतिरिक्त सर्वे कार्यों में ड्यूटी लगाने का विरोध किया है। इंदौर में प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि छोटे बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए अतिरिक्त सरकारी कार्य करना मुश्किल है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव ड्यूटी का भुगतान अभी तक नहीं मिला है और मानदेय में भी देरी हो रही है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि अगर उन्हें जनगणना जैसे अतिरिक्त कार्यों में लगाया जाता है तो उनके अवकाश को अर्जित अवकाश में बदला जाना चाहिए ताकि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके। इस मुद्दे पर अब स्कूल शिक्षा विभाग के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि यह मामला सीधे शिक्षकों के अवकाश और कार्यभार से जुड़ा हुआ है।
