नेपाल में हाल ही में बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा भारत से आने वाले सामान पर नए कस्टम नियम लागू किए जाने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों की नाराजगी बढ़ गई है। इन नियमों के अनुसार भारत से खरीदे गए सामान पर निर्धारित सीमा से अधिक मूल्य होने पर कस्टम ड्यूटी लागू की जा रही है जिससे स्थानीय लोगों की दैनिक जरूरतों पर सीधा असर पड़ा है।
इस मुद्दे पर भारत की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत को नेपाल की तरफ से लागू किए गए इस नियम की जानकारी है और यह मुख्य रूप से अनौपचारिक व्यापार और तस्करी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि निजी उपयोग के लिए ले जाए जाने वाले घरेलू सामान पर रोक नहीं है।
नेपाल के पत्रकारों के इस प्रतिनिधिमंडल ने विदेश सचिव से मुलाकात के दौरान भारत और नेपाल के ऐतिहासिक संबंधों और भविष्य की साझेदारी पर भी चर्चा की। भारतीय पक्ष ने दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि सीमा पार रिश्तों को स्थिर और संतुलित बनाए रखना दोनों देशों के हित में है।
सीमा क्षेत्रों में इस समय स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि स्थानीय लोगों की निर्भरता भारतीय बाजारों पर काफी अधिक है। रोजमर्रा के सामान राशन दवाइयों और कपड़ों के लिए सीमावर्ती इलाकों के लोग भारत पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में नए कस्टम नियमों के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है और नाराजगी भी बढ़ रही है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में यह विवाद केवल व्यापारिक नीति तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें आर्थिक प्रबंधन शासन व्यवस्था और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी असंतोष शामिल है। यही कारण है कि यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बनता जा रहा है।
इस बीच पत्रकारों की यह मुलाकात दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की एक कोशिश के रूप में देखी जा रही है जिससे भविष्य में उत्पन्न होने वाले तनाव को कम किया जा सके और आपसी समझ को बढ़ाया जा सके।
