झांसी। शुक्रवार को भक्त माल कथा के षष्ठम दिवस में सर्वप्रथम ग्रंथ पूजन महंत राम प्रिया दास महाराज, नारायण दास महाराज, विष्णु साहू, राजकुमार गोस्वामी, उषा नायक, अनिल सेगर, मनोज मिश्रा ने किया। कथा प्रवक्ता हरवन्स दास महाराज ने भक्त शिरोमणि भरत जी के चरित्र पर प्रकाश डाला। विष्व में भरत जैसा त्यागी भगवान का भक्त नही हुआ। कथा व्यास हरवंसदास का तिलक कर उनको माल्यार्पण कर उनको व्यास गद्दी पर विराजमान किया।

व्यास गद्दी पर बैठते ही पूज्य कथा ब्यास जी ने अपनी अमृत मयी सुरीली वाणी से “गोबिंद माधव हरि हरि बोल ,अपना प्रसिद्ध भजन सुनाकर पूरे पंडाल में जितने भी श्रोता थे सब मंत्रमुग्ध हो गए। कथा के प्रारम्भ में व्यास जी ने बताया कि तुलसीदास जी ने सिर्फ भगवान के नाम का स्मरण करने का संदेश दिया। कलियुग केवल नाम अधारा। हृदय से चिंतन करने मात्र से भगवान खुश होते है। बस चिंतन भावपूर्ण किया गया हो। कोई सोचे कि वह अपनी बुद्धि के बल पर भगवत कथा का स्मरण कर ले तो वह सम्भव नही है क्योकि जब तक भगवत कृपा नही होगी तब तक पूर्ण पारंगत होना असंभव है।

गोस्वामी तुलसी दास ने कहा कथा का ज्ञान विज्ञान प्राप्त करना विना हरि कृपा के सम्भव नही है। जिस पर प्रभु का रंग चढ़ जाता है उस पर कोई दूसरा रंग नही चढ़ता है,जैसे-सूरदास की काली कमर पर चढ़े न दूजो रंग। इसी प्रकार जिस पर श्याम रंग, राम रंग चढ़ जाता है उनपर फिर कोई रंग नही चढ़ता है।
माया तीन प्रकार की होती है जड़ माया, वैष्णवी माया, स्वर्णमयी माया, भगवान ने ब्रह्मा जी को वैष्णवी माया में मोहित किया तब ब्रह्मा जी ने नाभा जी के रूप में भक्तमाल की रचना है।
दो अपराध बड़े है भगवत अपराध और भागवत अपराध जयंत ने भगवान के प्रति अपराध नहीं किया बल्कि सीता जी के प्रति अपराध किया, अतः जयंत माफ करने लायक नहीं। सुग्रीव के मन में प्रभु श्री राम के प्रति अपराध आ गया, जब प्रभु श्री राम ने जब प्रभु श्री राम ने सुग्रीव को बाली से लड़ने के लिए भेजा, सुग्रीव के मन में आया कैसे प्रभु हैं यह तो मुझे मार डालेगा। मेरी मदद नहीं कर रहे हैं परंतु प्रभु श्री राम ने अपने प्रति किये अपराध को माफ कर दिया। भक्तमाल की दृष्टि में भगवान श्री कृष्णा और श्री राम का अवतार पूर्ण अवतार है।
समापन पर आरती राजेंद्र कुशवाहा, अनिल अरज़रिया, मंजू अर्जरिया, राघव गोस्वामी, लखन लाल पुरोहित, अंचल अरजरिया, गोविंद सिंह, जी पी शर्मा, r s भट्ट ने की।
