गुरु की शरण में जाने से होता है शिष्य का संपूर्ण कल्याण : मलूकपीठाधीश्वर

ओरछा/झांसी। शिष्य का कल्याण तभी है जब वह पूर्ण रूप से गुरुदेव भगवान की शरण में चला जाए। वह यह जान ले की स्वयं भगवान ही गुरुदेव के रूप में मेरा कल्याण करने के लिए आए हैं, तो उसका मरने के बाद नहीं, जीतेजी जीवन मुक्त हो जाएगा । यह प्रवचन भी सुरभि गौशाला में चल रही श्रीमद् भक्तमाल कथा के दौरान श्रीमलूकपीठाधीश्वर महाराज ने व्यक्त किए।

श्री सुरभि गोवंश एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान ओरछा द्वारा सुरभि गौशाला में सप्त दिवसीय श्रीमद् भक्तमाल कथा एवं श्रीराम महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें कथा पश्चात हजारों लोग भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं । आज चतुर्थ दिवस की कथा करते हुए मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज ने भक्तमाल कथा सुनाते हुए गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु की कृपा से अविद्या का नाश हो जाएगा ,उसकी माया का नाश हो जाएगा। उसका मरने के बाद नहीं, वह जीते जी जीवनमुक्त हो जाएगा।

 

उन्होंने ने कहा कि यदि शिष्य यह विचार करले कि साक्षात भगवान मेरा कल्याण करने के लिए गुरुदेव के रूप में आए हैं तो वह शिष्य जीवन मुक्त हो जाएगा । श्री देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि उसे शिष्य की अविद्या का नाश हो जाएगा, माया का नाश हो जाएगा, वह जीते जी जीवन मुक्त हो जाएगा । कल 9 जून को सुबह श्री कनक भवन बिहारी बिहारिणी जू का पंचाभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई जाएगी एवं संतों का भंडारा होगा।

 

श्रीकनक भवन बिहारी-बिहारिणी जू का प्रकोत्सव आज
श्री कनक भवन मंदिर में भगवान का 19 वां पाटोत्सव मनाया जा रहा है। जिसके उपलक्ष्य में श्रीराम महायज्ञ एवं श्रीमद् भक्तमाल कथा का आयोजन किया जा रहा है। श्री कनक भवन बिहारी बिहारिणी जी की प्रतिष्ठा ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया को हुई थी। इसके उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष श्री कनक भवन मंदिर में पाटोत्सव का आयोजन किया जाता है । कल भगवान का पंचाभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई जाएगी एवं संतों का भंडारा होगा। श्री मलूकपीठाधीश्वर महाराज ने बताया कि पूज्य सद्गुरुदेव भक्तमाली जी महाराज कनक भवन मंदिर स्थापना के लगभग 60 वर्ष पहले बनारस से पद यात्रा करते हुए ओरछा आए थे, तब वह तीन दिन भूखे भी रहे। उस समय भगवान श्रीराम राजा सरकार ने एक पंडित का भेषधर उन्हें एकादशी पर फलाहार एवं द्वादशी पर पारायण कराया उसके बाद लगभग 9 माह तक श्री रामराजा मंदिर प्रांगण में आसन लगाकर रहे और नित्य भगवान का राजभोग मिलता रहा। तब से ही उनकी इच्छा थी कि ओरछा में संत सेवी स्थान बने। 2005 में पूज्य गुरुदेव द्वारा भूमि ली गई, लेकिन उनके रहते श्रीकनक भवन मंदिर नहीं बन सका। पूज्य सद्गुरुदेव भगवान का गोलोक गमन 2006 के जेठ शुक्ल पंचमी को हो गया था। पूज्य गुरुदेव के सत्संकल्प से श्री कनक भवन बिहारी बिहारिणी जू की प्रतिष्ठा 2007 में की गई थी । तब से यह उत्सव प्रत्येक वर्ष अनवरत रूप से चल रहा है।

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